Tuesday, 23 June 2015

आधा सत्य - असत्य से बदतर होता है-ओशो


osho in hindi



ध्यान रहे, आधा सत्य - असत्य से बदतर होता है।
क्योंकि असत्य से छुटकारा संभव है, आधे सत्य से छुटकारा बहुत मुश्किल होता है।
जो आदमी कहता है कि मैं जन्म तो लिया हूं, लेकिन मरना नहीं चाहता। वह आदमी आधे को पकड़ रहा है। दुख पाएगा, अज्ञान में जीएगा। और कुछ भी करे, मौत आएगी ही, क्योंकि आधे को काटा नहीं जा सकता है। जन्म को स्वीकार किया है तो मौत उसका आधा हिस्सा है, वह साथ ही जुड़ा है।

जो आदमी कहता है, मैं सुख को ही चुनूंगा, दुख को नहीं। वह फिर भूल में पड़ रहा है। तुम आधे को चुन कर ही गलती में पड़ते हो। दुख सुख का ही दूसरा हिस्सा है। वह आधा हिस्सा है। इसलिए जो आदमी सुखी होना चाहता है, उस आदमी को दुखी होना ही पड़ेगा। जो आदमी शांत होना चाहता है, उसे अशांत होना ही पड़ेगा। कोई उपाय नहीं है।
परन्तु तुम अगर अपनी दृष्टि को बदलो तो दुःख भी सुख लगेगा,अशांति भी शान्ति लगेगी और मृत्यु भी एक नया जीवन प्रतीत होगी ।
उसके लिए है , ध्यान...... ध्यान के अतरिक्त कोई भी उपाय नही है...इसलिए मै तुमसे कहता हूँ ध्यान में डूबो..

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